औरत या मर्द के पीछे के मकाम में सोहबत यानि हमबिस्तरी करना कैसा है ?



औरत या मर्द के पीछे के मकाम में सोहबत यानि हमबिस्तरी करना कैसा है ?

और इस्लाम की रौशनी में इसके क्या क्या नुक़सानात हैं ?


ये बहुत अहम मसअले होते हैं जिनको समझना जरूरी होता है

इसमे शर्माना नहीं चाहिए इल्म ए दीन सीखना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फ़र्ज़ है



आइये समझते हैं मसअला


कुछ कम अक्ल लोग Periods यानि हैज की हालत में औरत के पीछे के मकाम में हमबिस्तरी कर बैठते हैं,

और दीनों दुनिया दोनों अपने हाथों से बर्बाद कर डालते हैं,

होश में आ जाओ ये कोई मामूली सा गुनाह नहीं है

बल्कि शरीयत में सख्त हराम और गुनाह ए कबीरा है

कुछ हदीसों में तो इसे कुफ़्र तक बताया गया है,



हदीस शऱीफ में आता है

हज़रते अबु हुरैरा (र०त०अ०) से रिवायत है कि

नबी करीम हुज़ूर ﷺ ने फरमाया - पीछे के मकाम में औरत से वती करना हराम है,



दूसरी हदीस शऱीफ में आता है

हज़रते अबु हुरैरा (र०त०अ०) से रिवायत है कि

नबी करीम हुज़ूर ﷺ ने फरमाया - जिसने औरत या मर्द के उसके पीछे के मकाम में जाइज़ समझते हुए सोहबत की वो यकीनन उसने कुफ़्र किया,





तीसरी हदीस शऱीफ में आता है

साहए सत्ता यानि अहादीस की 6 मुस्तनद किताबों

बुखारी शरीफ, मुस्लिम शरीफ, तिर्मिजी शरीफ, अबु दाउद शरीफ, नसाई, इब्ने माजा में है कि

नबी करीम हुज़ूर ﷺ ने फरमाया - अल्लाह तअला क़यामत के दिन ऐसे शख्स की तरफ नज़र ए रहमत नहीं फरमाएगा

जिसने औरत के पीछे के मकाम में सोहबत की होगी,

अल्लाहुअकबर



चौथी हदीस शऱीफ में आता है

हज़रते अबु हुरैरा (र०त०अ०) से रिवायत है कि

नबी करीम हुज़ूर ﷺ ने फरमाया - पीछे के मकाम में हमबिस्तरी करने वाला शख्स मलऊन है



प्यारे दोस्तों अगर हम गौर करें

तो मालूम होगा कि अक्ल की रूह से भी ये काम

निहायत हु गन्दा, मकरूह, हराम और नापसन्दीदा है,

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